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UGC एक्ट 2026 क्या है? नए नियमों की पूरी जानकारी और विवाद

यूजीसी समानता विनियम 2026: उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव रोकने के नए नियम



विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 — जिसे आमतौर पर यूजीसी एक्ट 2026, यूजीसी बिल 2026 या यूजीसी इक्विटी रूल्स 2026 कहा जाता है — भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन्हें 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया। ये नियम 2012 के पुराने भेदभाव-रोधी दिशानिर्देशों की जगह लेते हैं और विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में सुरक्षित और समावेशी माहौल बनाने का लक्ष्य रखते हैं, खासकर जाति-आधारित उत्पीड़न को रोकने के लिए।

पृष्ठभूमि: इन नियमों की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में लंबे समय से भेदभाव की समस्या रही है, खासकर जाति के आधार पर। इससे छात्रों में तनाव बढ़ता है और कई दुखद घटनाएं (जैसे छात्र आत्महत्याएं) हुई हैं। ये नियम सुप्रीम कोर्ट के कुछ मामलों से प्रेरित हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के समानता व समावेशन के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

UGC, जो 1956 के UGC अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, पहले केवल सलाहकारी दिशानिर्देश (2012) देता था, लेकिन अब 2026 में इन्हें अनिवार्य और लागू करने योग्य बनाया गया है।

यूजीसी समानता विनियम 2026 के मुख्य प्रावधान

ये नियम सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (केंद्रीय, राज्य, निजी, डीम्ड विश्वविद्यालय, दूरस्थ/ऑनलाइन शिक्षा वाले संस्थान) पर लागू होते हैं।

  • भेदभाव की व्यापक परिभाषा — जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता या सामाजिक-आर्थिक आधार पर कोई अनुचित व्यवहार (खुला या छिपा)। इसमें मानव गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कार्य शामिल हैं, जैसे हॉस्टल/लैब में जाति-आधारित अलगाव या अपमानजनक टिप्पणियां।
  • अनिवार्य संरचनाएं
    • सभी संस्थानों में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centres - EOCs) बनाना जरूरी, जो समावेशन को बढ़ावा दें और शिकायतें संभालें।
    • समानता समिति (Equity Committees) या जांच दल।
    • समानता अधिकारी (Equity Officer) की नियुक्ति।
    • वैकल्पिक रूप से समानता दूत (Equity Ambassadors) — छात्रों में से पीयर सपोर्ट।
  • शिकायत निवारण तंत्र
    • शिकायत मिलने पर 24 घंटे के अंदर समिति की बैठक।
    • समयबद्ध जांच और समाधान।
    • UGC के MANAS-SETU पोर्टल पर रीयल-टाइम ट्रैकिंग।
    • शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
  • दंड और जवाबदेही
    • छात्र/कर्मचारी/शिक्षक के लिए: चेतावनी, निलंबन, निष्कासन, हॉस्टल से बेदखली, डिग्री रोकना या पुलिस में FIR (SC/ST एक्ट या IPC के तहत)।
    • संस्थानों के लिए: फंडिंग कटौती, डिग्री कार्यक्रम रोकना या अन्य UGC कार्रवाई।
    • हर साल UGC को शिकायतों और कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी।
  • समावेशन पर फोकस — SC, ST, OBC, PwD, महिलाएं, EWS जैसे वर्गों की सुरक्षा। संवेदनशीलता कार्यक्रम, पाठ्यक्रम में समानता की शिक्षा और समावेशी माहौल को बढ़ावा।

ये बदलाव 2012 के सलाहकारी नियमों से अलग हैं — अब ये बाध्यकारी हैं, OBC को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, झूठी शिकायतों पर दंड हटाया गया है (ताकि रिपोर्टिंग बढ़े), और समय-सीमा सख्त की गई है।

विवाद और विरोध प्रदर्शन

नियमों के अधिसूचन के तुरंत बाद दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद आदि शहरों में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। आलोचकों का कहना है:

  • रेगुलेशन 3(c) में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा मुख्य रूप से SC/ST/OBC के खिलाफ है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को सुरक्षा कम लगती है → "पीड़ितों की श्रेणी" बनने का डर।
  • नियम "अस्पष्ट" हैं और दुरुपयोग हो सकता है, झूठी शिकायतों से कैंपस में विभाजन।
  • सामाजिक सद्भाव पर असर पड़ने की आशंका।

प्रदर्शनकारियों ने इसे असमान या राजनीतिक मकसद वाला बताया।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन 2026 विनियमों को लागू करने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि कुछ प्रावधान "प्रथम दृष्टया अस्पष्ट" हैं, संवैधानिक चिंताएं हैं और "विभाजनकारी परिणाम" हो सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया। फिलहाल 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे। अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को है।

छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों के लिए क्या मतलब?

अगर नियम अंततः लागू हुए (संशोधन के साथ या बिना), तो ये वाकई समावेशी कैंपस बना सकते हैं — भेदभाव के खिलाफ मजबूत और दृश्य कार्रवाई होगी। लेकिन विवाद बताता है कि संतुलित, दुरुपयोग-रोधी व्यवस्था की जरूरत है, जो सभी की सुरक्षा करे बिना नई दीवारें खड़ी करे।

अदालतों, कैंपस और सार्वजनिक बहस में चर्चा जारी है। यूजीसी समानता विनियम 2026 भारतीय उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय और निष्पक्षता की चुनौतियों को उजागर करते हैं।

आधिकारिक दस्तावेज UGC वेबसाइट पर उपलब्ध है (13 जनवरी 2026 को अधिसूचित)। स्थिति बदल रही है — सुप्रीम कोर्ट या UGC से अपडेट देखते रहें।

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